सन्नापाठ की खूबसूरती कृष्णा झरना

              कृष्णा झरना कोचाकोना

                              प्रकृति से खुबसूरत ना तो कोई है और रहेगा, प्रकृति जो कभी गुरु बनकर सिखाती है तो कमी मां बनकर दुलार करती है। और प्रकृति की सुन्दरता तो केवल अदभूत दिखती है पहाड़ी क्षेत्रों। छत्तीसगढ़ में पठारी क्षेत्र की बात करतें है सन्ना पाठ क्षेत्र का नाम मन में ना उभरे यह हो ही नही सकता है। (जो सन्ना पाठ क्षेत्रों को जानते हैं)। सन्ना क्षेत्र का दृश्य नजरों में आये अपरिचित लोंगों को कोरवा ,आदिवासी ,पिछडापन और जंगलो का मध्य बसाहट गांव नजर आयेगा।

                             किन्तु सन्नापाठ क्षेत्र की वास्तविक दृश्य कुछ और ही हैं, जिसमें झरनो का स्वर पहाड जंगलों का अदभुत नजारा ,नदियों की सुन्दरता का विहंगम दृश्य ,यहां की संस्कृतियों जो  मन को मोह लेने वाला है, और पहाड़ों के गीतों का स्वर तो अनोखा मानो सात स्वर यही रमें हुए है।

     

कृष्णा झरना का दुसरा स्टेप
                                 इस सन्नापाठ क्षेत्रों में अनेक झरना है उसमें कृष्णा झरना जो मन को मोह ने वाला है। म़ै और मेरा मित्र महेंद्र बंजारे (पोस्ट मास्टर सन्ना)  दोनो इस झरने को देखने सन्ना (नवीन तहसील) निकल पडे, पहाड़ी नागिन ( बाईक) से जशपुर रोड में निकले 6 किलो मीटर के बाद तोरा जाने वाले रास्ता की ओर मुडकर पुल पार किये, कुछ गांव तोरा शुक्रा,डोभ पार करने के बाद जंगलो के मध्य रास्ते से हमारा सफर जारी था , 15-20 किलोमीटर उपरांत तमया जाने का कच्चा सडक मिला , बरसात के कारण सडक का स्थिति डावांडोल है, हम झरना से आधे किलोमीटर दुर अपने बाईक को छोडकर झरना की ओर निकल पडे। झरना के समीप जंगल जो मन को मोह रहे थे अनायास ही कदम उस वन की ओर मुड गये, 200 मीटर चलने के बाद दृश्य ऐसा लगने लगा मानो हम जमीन के सबसे उपरी छोर मे हैं। दुसरे तरफ खाई नुमा दिख रहा था। 
जंंगल का जगह

झरना का पहला स्टेप

वापस झरने की ओर गये, और हम झरना के ऊपरी छोर से नीचे उतरे तभी हमे एक काटेज दिखाई दिया, उस ओर जाने पर हमें छोटा छोटा गुफा दिखाई दिया,वहां के रहवासी झरने के समीप ही दो तीन गुफा बनायें हैं, और इन गुफाओं में मां दुर्गा जी ,कृष्णा जी ,हनुमानजी जी की मुर्ति मौजूद है। यहां हमने शीश झुकाया अगरबत्ती जलाई और झरने की ओर मुड पडे। और सामने था  कृष्णा झरना ,यह झरना 3-4 स्टेप मे गिरता है पहला स्टेप 25 फिट से गिर रहा है दुसरा भी लगभग 20-25 फिट की ऊंचाई से गिर रहा है।  दुसरा स्टेप की ओर बढ ही रहा था पर ये क्या ! दो पत्थरों के मध्य से आगे बढ ही रहा था कि -ये क्या ? मेरा पैर धंस गया ओह ! मुझे चोट लगा, सम्हल कर देखा तो दो पत्थरों को मध्य जो मिट्टी जमीन है उसी में पैर धस गया । 


                 एक झरने के बाद दुसरा झरना देखने गये मन बहुत ही आनंदित था, हो भी क्यों नही आखिर प्रकृति के सौन्दर्य के समीप भी मौजूद हुं। 

       प्रकृति की गोद में बसा यह स्थल मनमोहक तो है ही पर मन में प्रेम बढाता है।

   

                         जंगली फुल

                       रामकुमार तिवारी

             सन्ना, जिला-जशपुर(छग)

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