*मकरभंजा जलप्रपात एक अपूर्व अनुभव*
मकरभंजा जलप्रपात एक अपूर्व अनुभव
छत्तीसगढ का सबसे ऊंचा जल प्रपात में से एक
मैं प्रकृति प्रेमी हूं,और हुं भी क्यों नहीं आखिर प्रकृति की गोद में पला बढ़ा हूं।साथ ही महादेव का भक्त भी हुं, वे महादेव जिन्हें प्रकृति से सुंदर और कोई अच्छा नही लगता। मेरा जन्म स्थल और निवास सन्ना है। सन्ना, सन्ना क्षेत्र कोरवा जनजाति की अधिष्ठात्री देवी मां खुड़िया रानी की गोद में बसा है। मां खुडिया रानी की इस हरी आंचल रूपी इस क्षेत्र में जनजाति कोरवा का कर्मा, उरांव का सरहुल के अलावा हरिजन का जीतिया के अलावा अन्य त्यौहार में मांदर, ढफला का थाप शहनाई का स्वर सदैव से गुंजायमान रहता है। तथा साथ ही इन जनजातियों के अलावा यहां निवासरत यादवों का लऊर लाठी और नगेशिया के त्यौहार, और इस मिट्टी में ऊपजी संस्कृति इस क्षेत्र का शोभा बढाये रहती है। सन्ना क्षेत्र के गोद में इसके औषधालय की खान के साथ टमाटर, मिर्च, और अन्य हरी सब्जियों का खेती भी बडे पैमाने पर किया जाता है। सन्ना को छत्तीसगढ़ का शिमला से उपमा दिया गया है। सन्ना क्षेत्र में ठंड ,ठंड के दिनों में 5℃-6℃ तक पहुंच जाती है।
नवीन तहसील सन्ना क्षेत्र पहाडियो जंगलो से घिरा है यहां के कुछ क्षेत्रों को देखने दुर दूर से आते हैं और कुछ खुबसूरत जगह को मां खुडिया रानी अपने आंचल में छुपाये हुए, ऐसा लग रहा मानो उस जगह को मानव विनाश (इंसान अपने सुविधा के लिए जंगलो के वृक्षों को काटना ) से बचा रही है। सन्ना क्षेत्र में मनोरम दृश्यों में मां खुडिया रानी का धाम, गहिरा गुरु की तपोस्थली कैलाश गुफा, दराव जल प्रपात (दनगरी जल प्रपात) नन्हेसर के पास पुराना मंदिर है। तो वहीं मां के हरा आंचल मे छुपा मकरभंजा जलप्रपात और महनई जलप्रपात है।
सन्ना से जाने का मैप
मकरभंजा जलप्रपात नवीन तहसील सन्ना के मुख्यालय से 38 किलोमीटर और जिला जशपुर मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है। जिला से यहां आने के लिए सन्ना, सन्ना से पंड्रापाठ से होते हुए सुलेसा ,महनई से कदमटोली की ओर जाना पडता है। गाडिय़ों का आवागमन की बात की जाय तो जलप्रपात के नीचे उतरने के जगह से 1 किलोमीटर दूर गाडी को छोडना पडता है।
मकरभंजा का मनमोहक दृश्यमैं (रामकुमार तिवारी ,सहायक शिक्षक सन्ना) और मेरे मित्र श्री महेंद्र बंजारे ( पोस्ट मास्टर, पोस्ट आफिस सन्ना) दोनो सन्ना से 38 किलोमीटर मकरभंजा जलप्रपात के लिए निकले । मकरभंजा जलप्रपात को देखनेवाले छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंचा जल प्रपात( 400 फीट) कहते है। इसे देखने जाने पर जल प्रपात की ऊंची चोटी से नीचे झरना के समीप खाई में उतरना पडता है। ऊपर से यदि जलप्रपात को देखे तो मन मोह लेता है। और नीचे जलप्रपात के समीप जाने के लिए पैर मजबूत और मन में इच्छा शक्ति मजबूत होनी चाहिए।
जब हम इसकी ऊंची चोटी पर पहुंचे तो ऐसा लग रहा है, लगता है चोटी आसमान से बातें कर रहा हो। पहाडों का खुबसुरत दृश्य मन को लुभा रहा था । पहाडों से नीचे उतरने का मन में आने से ही मन रोमांच महसुस करने लगा। जब हम खाई से दूसरी ओर सुकून और शांति का अनुभव हुआ, और जब हमने झरने की विपरीत छोर की जाकर झरने को नजारा देखा महसूस किया कि हां यदि कहीं स्वर्ग है तो यही स्वर्ग है। पर जब जमीन की ओर नीचे का दृश्य सामने आया तो खाई को देखकर मन में सिहरन सी दौड गयी, आत्मा तो प्रफुल्लित था।
नीचे खाई मे उतरने के लिए एक गाईड ( यह वही पर रहता है) को लेकर निकले खाई में सम्हल सम्हल कर उतरते गये खाई से नीचे उतरते समय कुछ जगहो पर फिसलन ( बालू गिट्टी जगह ) भी पडा,तो कुछ जगह पर खाई का रास्ता (पकडंडी) 10 इंच था । खाई में उतरते समय जंगली जानवरो का भी भय लग रहा था, किन्तु गाईड ने साहस बंधाया ऐसा यहां अभी कुछ नही है, हां डर यह भी लग यहा था उतरने के बाद उपर चढेंगे तो कैसे? जंगलों के मध्य कुछ अजीब सा पौधा, वृक्ष भी नजर आ रहा था,मानो वे हमें अजनबी की नजर से देख रहों हो और पुछ रहे हो ये मानव कौन हैं। सकरे और अंग्रेज़ी की तरह दिखने वाले Z आकार का पगडंडी मुस्कुरा कर पुछ रहे हों " भाई उतरेगा कैसे और आते समय चढेगा कैसे ।"
https://youtu.be/5iPiVCBfsrA makarbhaja an adventure युट्यूब में भी देख सकते है
मन में सिहरन, रोमांच, आंनद के साथ हम तीनों आधा घंटा में खाई के नीचे उतरे, और नदी पार करते हुए जलप्रपात के पहुंचे और जलप्रपात को देखने पर लग रहा हो वह हमें मुस्कुरा कर स्वागत कर रहा हो और किसी बिछडे मित्र की तरह आंलिगन करना चाह रहा हो। करीब आधा घंटा के बाद हम ऊपर जाने को तैयार हुए चढते समय मन मजबूत किये और चढाई मे चल पडे। 3,4 जगहो पर विश्राम करते हुए मंजिल की ओर चल दिये। पतले रास्तों पर चलते चलते कभी बंदरों की तरह भी चलना पडता था मुस्किल राह भी सोंच रहे हों यह कौन से प्रजाति के बंदर है। कभी कभी चढाई के रास्तो के मध्य सांसो के फुलने से ऐसा लग रहा था अब यहां आखरी आना है ।
वाकई में लगा मां खुडिया रानी के आंचल का सबसे नायाब नवीन तहसील सन्ना में सबसे अनमोल जगह है, और सभी से निवेदन एक बार अवश्य इस जगह को देखने आयें।
*रामकुमार तिवारी "कुमार"*
*सन्ना ,जशपुर*
मकरभंजा का नीचे तल
जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामना





वाह , बहुत ही मनोरम दृश्य और उतना ही उत्तम वर्णन
ReplyDeleteधन्यवाद पांडेजी, मैं गया तो 1 सप्ताह चलने मे दिक्कत था।
ReplyDeleteनिचे जाने और ऊपर आने में
दिलीप भाई कमेंट ....अति रमणीय दृस्य और रोचक वर्णन ।मधुर प्रकृति प्रेमी को इंगित भाव प्रस्तुति ।थैंक्स...
ReplyDeleteधन्यवाद सरजी
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