माँ खुडिया रानी का हरा आंचल
*मां खुडिया रानी का हरा आंचल सन्ना*
मां खुड़िया रानी जो साल वनों की पहाड़ियों में हरियाली आंचल ओढे हुए हैं उनके चरणों में मेरा सदा प्रणाम है।
मां खुड़िया रानी के आंचल में बहुत सारे मनोरम दृश्य, तथा इनका पूजनीय स्थान हैं सर्वप्रथम तो इनकी पहाड़ी की चोटियां हरी-भरी हैं और ऊंचाई के बारे में बात करें मानो लगता है पहाडों की चोटियाँ और आसमान गहरे मित्र हैं।
मां अपने आंचल में बहुत सी जलप्रपात संजोए हुए है। जो मां खुडिया क्षेत्र का मुख्यालय तहसील सन्ना से लगभग पास में हैं। सन्ना के पश्चिम की ओर जातें है तो हमें मकरभंजा जलप्रपात ( सन्ना से लगभग 48किलोमीटर), दनगरी जलप्रपात ( सन्ना से 45 किलोमीटर), महादेव का दर्शनीय स्थल कैलाश गुफा सन्ना से 50 किलोमीटर), मां खुडिया रानी का (सन्ना से लगभग 37 किलोमीटर) पूजनीय स्थल है, पूर्व की दिशा की ओर गुल्लू जल प्रपात (सन्ना से लगभग 35 किलोमीटर )है , और दक्षिण दिशा में बगीचा तहसील के समीप राजपुरी जल प्रपात है।
जैसे ही हम जशपुर जिला से आ रहे होते हैं इंदा घाट से हैं हम पहाड़ी क्षेत्र में अर्थात मां खुड़िया रानी के आंचल में समाहित होते जाते हैं मन प्रफुल्लित हो उठता है और मां के आंचल में बहुत सुकून और शांति का अनुभव होता है सड़क के दोनों ओर हरियाली ही हरियाली है बरसात के दिनों में इन जंगलों में धूंध छाये रहता है। यहां साल वन बहुत अधिक मात्रा में मिलता है। साल वन जो बहुत ही मजबूत लकडी मानी जाती है।
यहां रहने वाले लोग आदिवासी हैं और कहा जाता है कि कोरवा,कंवर, नगेशिया यहां 200 वर्ष पूर्व से निवासरत है। यहां के आदिवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि और मजदूर करना है। और लगभग 10 वर्षो से इन क्षेत्रों में मिर्च, टमाटर, आलु के बहुत ही ज्यादा खेती होता है। अब इन क्षेत्रों में सब्जियों का भी उत्पादन होने लगा है, किंतू जो लाभ इन किसानों को होना चाहिए वह नही होता हैं । जिला प्रशासन इस क्षेत्रों में ध्यान दे तो शायद कृषकों की अपने उपज का उचित कीमत मिले।इस क्षेत्र के लोग पुटू बडे चाव से खाते है ,यह जंगलों में उगता है तथा इसके प्रशंसक बरसात के दिनों इसे पाने को उतावले रहते हैं।
यहां पहाड़ियों में हमारे पहाड़ी संस्कृति का धुन गुंजायमान रहता है। हिन्दी नववर्ष के प्रथम माह चैत्र में नववर्ष का सत्कार मां जगत जननी की और मां खुडिया रानी की उपासना उनके चरण कमलों पर नतमस्तक होकर चैत्र नवरात्र की पूजा अर्चना से की जाती है। और इसी समय उरांव जनजाति (जो अभी भी अपने परम्परा को माने है और उसी के उपासक हैं।) प्रकृति की उपासना सरहुल पूजा करके स्वागत कर रहा हो मानो ऐसा लगता है कि नववर्ष का स्वागत पघारकर कर रही हो। यहां के प्रकृति वातावरण में विवाह के मंगलगान युवाओ की अपने संस्कृति में खोकर नृत्य संगीत का लुफ्त उठाना साथ ही लऊरलाठी, करमा ,जीतिया पूजा,छठ पूजा आदि मना कर से अपनी संस्कृति को संरक्षित किए हुए हैं
मां खुड़िया रानी का पावन दर्शनीय और पूजनीय स्थल जिला मुख्यालय जशपुर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है यहां जाने के लिए जशपुर से सन्ना 53 किलोमीटर और सन्ना से रौनी होते 37 किलोमीटर दूर है। जानकारी के अनुसार खुड़िया रानी खुडिया क्षेत्र के दीवान की कुल देवी है, और मां खुड़िया रानी की सेना भंवर है।
रामकुमार तिवारी *कुमार*
सन्ना जशपुर
टीप:-सन्ना क्षेत्र का प्रकृति नजारा देखने के लिए लघु फिल्म यूट्यूब पर देखें एक मुलाकात एलियन के साथ।
https://youtu.be/K1lA45SQIqg
Comments
Post a Comment